Tuesday, December 9, 2008

कस्टम्स विभाग के आदेश से आसान हुई आतंकियों की राहें

7 Dec 2008, नवभारतटाइम्स.कॉम

नई दिल्ली : मुंबई में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद सरकार यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर उसकी विशाल प्रशासनिक मशीनरी के किस हिस्से से चूक हुई , वहीं मुंबई के कस्टम्स अधिकारियों का एक तबका इस उधेड़बुन में उलझा है कि कहीं इस चूक की एक वजह वह आदेश तो नहीं जो कुछ माह पहले उनके विभाग के एक बड़े अधिकारी ने जारी किया था ! इसी आदेश का नतीजा था कि आम तौर पर चौबीसो घंटे सतर्क और सक्रिय रहने वाले कस्टम्स विभाग ने मुंबई आतंकी हमलों से कुछ महीने पहले से ही गश्त और तलाशी का काम लगभग बंद कर रखा था।

भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक मुंबई के कस्टम्स कमिश्नर (प्रिवेंटिव) शोभा राम ने इसी साल 23 जुलाई को जारी किए गए निर्देश (निर्देश संख्या 01 / 2008 ; F No. CIU / XI-XVIII / 2008 / 657 ) में कहा कि जब तक कि एकदम पक्की और डीआरआई - 1 फॉरमैट में लिखित रूप में दर्ज सूचना न हो , गश्त के दौरान कस्टम्स अधिकारियों को किसी कंटेनर या वाहन को रोकने या उसकी तलाशी लेने की इजाज़त नहीं होगी।

इस आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर किसी अधिकारी ने पर्याप्त अधिकार और पूर्व इजाज़त के बगैर किसी वाहन को रोका या उसकी तलाशी ली तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि 1993 के मुंबई बम धमाकों का कड़वा अनुभव होने (तब भी समुद्री मार्ग से ही विस्फोटक मुंबई पहुंचाए गए थे) और बेंगलुरु , अहमदाबाद , दिल्ली जैसे शहरों में हुए बम धमाकों के बाद मुंबई में ऐसे किसी हमले की आशंका होने के कारण कस्टम्स अधिकारी महसूस कर रहे थे कि उन्हें और अलर्ट होकर काम करना चाहिए। लेकिन , इस आदेश ने उनके हाथ-पांव बांध रखे थे।

बताया जाता है कि यह आदेश कुछ कस्टम्स अधिकारियों की हरकतों पर रोक लगाने के लिए लाया गया था जो जांच-पड़ताल के नाम पर हर कंटेनर या वाहन को रोक देते थे और पैसे वसूल करके ही उसे छोड़ते थे। लेकिन इसने विभाग के उन अधिकारियों को भी अपना काम करने से रोक दिया जो टूटी-फूटी पुरानी बोटें और पेट्रॉल की कमी जैसी बाधाओं के बावजूद अपनी सक्रियता कम नहीं होने दे रहे थे।

इस लिखित आदेश का नतीजा यह निकला कि कस्टम्स विभाग के प्रिवेंटिव विंग की देखरेख में चलने वाला तटीय क्षेत्रों की निगरानी का काम लगभग ठप हो गया। इस आदेश ने वाहनों की चेकिंग ही नहीं , गश्त के काम पर भी असर डाला था। आदेश के अनुसार अफसरों को किसी वाहन की तलाशी से पहले डीआरआई-1 (डाइरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस प्रिसक्राइब्ड फॉर्म) भरना जरूरी हो गया था। जानकारों के मुताबिक इस जटिल प्रक्रिया को पूरा करने में तीन से चार दिन लग जाते हैं।

यानी अब कस्टम्स अधिकारियों के लिए यह संभव नहीं था कि गश्त के दौरान संदेह होने पर किसी बोट या कंटेनर की तलाशी ले सकें। इसका नतीजा यह हुआ कि तलाशी ही नहीं , गश्त का काम भी लगभग ठप हो गया।

हम यह नहीं कह रहे कि यह आदेश आतंकवादियों को विस्फोटक और हथियार भारत में पहुंचाने में मदद देने के लिए जारी किया गया था। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि कस्टम्स विभाग के इस आदेश ने आतंकवादियों का काम आसान बना दिया। बेहतर यह होता कि कस्टम्स विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कोई और कदम उठाया जाता।

इस आदेश के बारे में कस्टम्स कमिश्नर (प्रिवेंटिव) शोभा राम का पक्ष जानने के लिए उनके घर फोन करने पर बताया गया कि वह शहर से बाहर हैं। घर वालों ने मोबाइल नंबर देने से इनकार कर दिया।

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