ऐसा हमेशा से देखा गया है की जब भी हमारे देश में कोई भी आतंकी घटना होती है तो देश की जनता उसे कुछ दिनों में भुला देती है | ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आम आदमी अपनी दैनिक समस्याओं में इतना उलझा रहता है की उसे अब ऐसी बड़ी आतंकी घटनाये भी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी का एक हिस्सा लगने लगती है | उसकी इसी मजबूरी का फायदा राजनेता ये बोल कर उठाते है की "ये तो हमारे शहर की स्प्रिट है" और अपनी जिम्मेदारियों से बड़ी आसानी से पल्ला झाड़ लेते है | और तो और इन राजनेताओं को ऐसी घटनाये भी बहुत छोटी लगती है और ऐसी घटनाये उन्हें बिल्कुल भी प्रभावित नही करती क्योंकि उन्हें पता है की ऐसी आतंकवादी वारदातें अब सिर्फ़ आम आदमी को निशाना बनाती है | आम आदमी आतंकवादियों के लिए सॉफ्ट टारगेट होता है | उसे मारने में आतंकवादी को भी बहुत जद्दोजेहेद नही करनी पड़ती और भारत जैसे देश में उसे स्थानीय मदद भी आसानी से मिल जाती है |
पर इस सब से हमें ये याद रखना ही होगा की :
* अब से हम ऐसी घटनाओ को भुलाये नही बल्कि हमेशा याद रखे की हम लोग अगर ऐसी घटनाओ के शिकार हो रहे है तो ये ज़रूर जाने की इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और मंत्रियों के ख़िलाफ़ क्या कार्यवाही की गई है |
* हमारे देश के गृह मंत्री ने इस घटना की ज़िम्मेदारी लेते हुए तुंरत अपने पद से इस्तीफा क्यों नही दिया |
* महाराष्ट्र के गृह मंत्री आर आर पाटिल ने इस घटना को एक छोटी घटना कहने की हिम्मत कैसे दिखाई और उसके बाद आम जनता से इसकी माफ़ी मांगते हुए अपने पद से इस्तीफा क्यों नही दिया |
* शहीदों के लिए राज्य सरकार और केन्द्र सरकार ने जो घोषणा की क्या वे सच में शहीदों के परिवारों को मिली या सिर्फ़ घोषणा मात्र बन के ही रह गई |
* शहीदों के परिजनों को इन सहायताओं का लाभ पहुंचाने सरकारी अधिकारी स्वयं उनके घर तक गए या उन परिजनों को अपनी एडियाँ रगड़नी पड़ी|
* जैसा की पहले भी हुआ है की शहीदों के परिजनों को उनका हक पाने के लिए रिश्वत देनी पड़ी थी, क्या वह सब कुछ कहीं दुबारा तो नही दोहराया गया |
* केन्द्र सरकार ने आम जनता की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाये और अमेरिका की तर्ज पर हमारे देश में अब तक किसी राष्ट्रीय स्तर की किसी एजेंसी का गठन क्यों नही हुआ |
* ताज, ओबेरॉय और नरीमन हाऊस पर हमले की घटना के बाद फ़ौरन अफज़ल गुरु को फासी क्यों नही दी |
* जब अमेरिका पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानो पर हमला करने की हिम्मत कर सकता है तो आख़िर भारत की सरकार ऐसा करने की हिम्मत क्यों नही कर पा रही है | कहीं कांग्रेस को अपने अल्प संख्यक वोट के खोने का डर इतना तो नही सता रहा की वो इस वजह से देश की अस्मिता से समझौता करने को तैयार है |
* इस आतंकवादी हमले के दौरान विभाजनकारी राजनीति करने वाला राज ठाकरे क्यों गधे के सर से सींग की तरह गायब हो गया और क्यों नही उसने उन NSG के सैनिको को अपनी श्रद्धांजलि नही दी जिन्हों ने मुंबई और मराठी मानुस को बचाने में अपनी जान कुर्बान की |
* सारे राजनेता एक जैसे है और उनके लिए सत्ता और राजनीति ही सर्वोपरि है |
* तुष्टिकरण और अल्प संख्यकों की राजनीति करने वाले देशद्रोही नेताओं और पार्टियों का सफाया करना होगा तभी हम सब सुरक्षित हो सकते है |
* आने वाले चुनाव में ज्यादा से ज्यादा लोग अपना मत दान करें और इस गैर जिम्मेदार सरकार को उखाड़ फेके |
3 comments:
हिन्दी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है, खूब लिखें, अच्छा लिखें, शुभकामनायें साथ हैं, एक अर्ज है कि कृपया वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें, फ़िलहाल चिठ्ठाजगत में इसकी आवश्यकता नहीं है… धन्यवाद
स्वागत
आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे..... हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
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