Saturday, November 29, 2008

कब तक सहेंगे हम इस आतंकवाद को

कब तक सहेंगे हम इस आतंकवाद को| कब तक हम मूक दर्शक बन कर लोगों को सड़कों पर मरते हुए देखते रहेंगे| कब तक हम इन गैर जिम्मेदार नेताओं को तुष्टिकरण की राजनीति करने देंगे| क्यों नही हम आवाज़ उठाते है और जवाब मांगते है अपने नेताओं से जो की ताज, ओबेरॉय और नरीमन हाउस पर हुए हमले की पूरी जानकारी रखते हुए भी उसकी रक्षा करने में नाकामयाब रहे | हमारे देश के उद्योग कब तक ऐसी आतंकी हमलों को झेलेंगे| ऐसा कब तक चलता रहेगा|

अब समय सिर्फ़ सवाल पूछने का नही है बल्कि हमे सीधे तौर पे ये समझना होगा की ये नेता जब तक अपने आप को पूरी तरह से सुरक्षित मानते रहेंगे तब तक वो आम जनता की सुरक्षा के लिए कुछ नही करेंगे | अब हमें ये दबाव सरकार पे डालना होगा की ऐसे नेता जो की सीधे तौर पर आतंकवादियों का साथ देते है उन्हें कोई भी सुरक्षा न प्रदान की जाए | मुलायम सिंह यादव, अमर सिंह, फारूख अब्दुल्ला, मायावती, वाइको आदि ऐसे ही कुछ नाम है जिन्हें की सीधे तौर पर जनता को देश के राजनीतिक परिदृश्य से मिटा देना चाहिए क्योंकि ये तुष्टिकरण की राजनीति के नाम पर देशद्रोह कर रहे है | आज देश की जनता लगातार होते इन हमलों से उकता चुकी है और उकता चुकी है ऐसे नेताओं से जो पिछले ६० सालों से धर्म निरपेक्ष राजनीति के नाम पर सांप्रदायिक राजनीति करते आ रहे है | इनमे सबसे प्रमुख और सबसे गैर जिम्मेदार रवैया रखे वाली पार्टी है कांग्रेस जो की देश के गद्दारों की मदद से देश की सत्ता पे काबिज़ है |

आज हर आम आदमी के मन में दुःख है और गुस्सा है की क्यों सारे समझौते उसकी सुरक्षा के साथ ही किया जाते है | सबकुछ मालूम होते हुए भी समय पर कार्यवाही क्यों नही की जाती | क्यों हम करदाताओं के अरबों रुपये इन नेताओं के नाश्ते और ऐश में खर्च किए जाते है | संसद सत्र के दौरान क्या क्या होता है हम सभी देखते है और इन नेताओं को देश का समय बरबाद करने के लिए भी करोड़ों रुपये मिलते है | क्यों हम ये सब देख कर भी इन नेताओं से सवाल नही करते | सूचना के अधिकार का कानून क्यों सांसदों पर लागू नही है | क्यों आज हर एक सांसद अरब पति है और देश की ८०% जनता २० रुपये रोज़ पर गुज़ारा करने पर मजबूर है | क्यों इन नेताओं की सुरक्षा में लगे हर कमांडो के हाथ में एक ऐ के ४७ होती है जब की आम नागरिक की सुरक्षा के जिम्मेदार सिपाही के हाथ में मामूली सा डंडा |

आज जब देश इतने बड़े आतंकी हमले को झेल चुका है तब हम पाकिस्तान से सिर्फ़ बातचीत का रवैया क्यों अपनाए हुए है | क्यों नही अमेरिका की भाँती हम भी आतंकवादियों के ठिकानो पर हमला बोल सकते | आख़िर ये नेता वोट बैंक की राजनीति जिस समुदाय विशेष के तुष्टिकरण की खातिर कर रहे है वो समुदाय भी तो आतंकवाद की चपेट में आरहा है | इन धर्मनिरपेक्षता की राजनीति करने वाले नेताओं को ये समझना होगा की पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंक के निशाने पर सिर्फ़ हिंदू नही है | उसके लिए पूरा हिन्दुस्तान उसका दुश्मन है और यहाँ पर रहने वाले मुसलमान भी उसके दुश्मन है | उसके भेजे आतंकी सिर्फ़ हत्या करने नही आते है बल्कि उनकी कोशिश ये होती है की भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि को कैसे नुकसान पहुँचाया जाए और ये आतंकी ऐसा करने में कामयाब भी हुए है |

आतंकवादयों की हिम्मत इन नेताओं के लचर रवैये के वजह से इतनी बढ़ गई है की अभी अभी एक हमला ख़त्म भी नही हुआ है की और धमकी भरी मेल भेजी जाने लगी है | अब समय आगया है की देश के लोग इन नेताओं के सामने ये सवाल रखे और और उनसे जवाब मांगे तभी इस देश का आम नागरिक सुरक्षित हो सकेगा |

मुकुल शुक्ला

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